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June 23, 2012

झारखंड का विकास



झारखंड में विकास जोरों पर है. इसका पता झारखंड जाने वाली ट्रेन में ही लग जाता है. अधिकतर जवान..लेकिन तोंद निकली हुई. छोटे बच्चों से बोगी भरी हुई है. कोई ठेकेदारी करता है तो कोई ट्रकों का धंधा. कोई कोयले की दलाली में है तो कोई सूदखोरी में. सच में विकास जोरों पर है.
मोबाइल फोन पर लगातार बजते हुए गाने साबित करते हैं कि रांची के बच्चे भी छम्मक छल्लो और रा वन से आगे निकल कर रिहाना और लेडी गागा तक पहुंच सकते हैं. लेकिन हिंदी की चार पंक्तियां भी सही सही बोल लें वही बहुत है.
सत्यमेव जयते का फैन क्लब यहां भी है. लोग रिकार्ड कर के लैपटॉप पर आमिर से ज्ञान ले रहे हैं. दहेज पर. दहेज में लैपटॉप भी मिलता है ऐसा बिहार झारखंड के लोग कहते हैं. दहेज के लैपटॉप पर आमिर का ज्ञान कितना अच्छा लगता है. बोलने में अच्छा लगता है दहेज नहीं लेना चाहिए लेकिन लेने में बुरा किसी को नहीं लगता. दहेज नहीं वो तो विवाह खर्च होता है. बड़े घर में शादियां ऐसे ही होती है. सच में विकास जोरों पर है.
लैपटॉप पर फिल्में चल रही है. कुछ दिन पहले रिलीज हुई इश्कजादे. कोई फोन पर कह रहा है. हमारा पैसा क्यों नहीं दिए. कल आके ठोक देंगे तो ठीक लगेगा. बढ़ी तोंद वाला यह जवान ठेका पाने की खुशी में दारु-मुर्गा का न्योता भी दे चुका है. मसूरी से लौटता यह दंपत्ति दुखी है कि मसूरी में गर्मी थी और गुस्से में कि मसूरी से आगे कुछ देखने के लिए ही नहीं था. मसूरी में गर्मी की छुट्टियां बेकार हो गई हैं. उन्हें कौन बताए कि मसूरी से आगे देखने के हज़ारों खूबसूरत नज़ारे हैं. लेकिन झारखंड की जनता मसूरी जा रही है तो निश्चित है विकास ज़ोरों पर है.
शहर से गांव कस्बों की दूरी झारखंड में अधिक नहीं है. जमशेदपुर में बस से उतरते ही एक ऑडी, एक बीएमडब्ल्यू देखते ही मैं समझ जाता हूं कि मैं एक ऐसे शहर में हूं जो दिल्ली मुंबई के आगे हो जाना चाहता है. मैं मोटरबाइक पर ही निकलता हूं अपने घर की तरफ. छोटे छोटे गांवों से होते हुए कॉलोनी तक पक्की सड़क है लेकिन सड़क पर कारों की भरमार है. सूमो, बोलेरो और कभी कभी स्कार्पियो को भी साइड देना पड़ रहा है. छोटे वाहनों और पैदल चलने वालों की औकात ही नहीं है. ज़ाहिर है विकास जोरों पर है.


सड़क के दोनों ओर तैनात जंगल अब कट गए हैं. टाटा बढ़ रहा है. कटे जंगलों की जगह विकास के सबसे बड़े मॉडल फ्लैट बन रहे हैं. फ्लैट में रहने का पहला मतलब है आप विकसित हैं. बचपन में हम ऐसे घरों को दड़बा कह कर हंसा करते थे. हमें नहीं पता था कि ये हमारा भविष्य है. भले ही इन फ्लैटों के बनने में जंगल के जंगल तबाह हो जाएं लेकिन यही हमारा विकास है. यही झारखंड की प्रगति है.
फ्लैट कम होते जाते हैं और गांव आने लगते हैं. मैं सूकून पाता हूं हरियाली में लौटते ही. सड़कों के किनारे मिट्टी और पत्थरों को मिला कर बनाए गए आदिवासियों के घर मेरे बचपन की यादों का अहम हिस्सा रहे हैं. इतनी सपाट तो सीमेंट की दीवारें नहीं होती. यदा कदा चारखाने की धोती दिखती है. काली गठीली देह पर यह छोटी धोती फबती खूब है. वैसे शर्ट पैंट पतलून का विकास तो पहले ही हो चुका था. अब लोग जूते भी पहनते हैं. मोजे के साथ. सच में विकास जोरों पर है.
हाड़तोपा के पास तिलका मांझी की एक प्रतिमा मेरे सामने ही लगी होगी. तिलका मांझी चौक बाबा तिलका चौक हो गया है. तिलका मांझी को बाबा तिलका होने में ज्यादा समय नहीं लगा है.. इतने ही कम समय में झारखंड का विकास भी हो गया है.
आगे ही एक मैदान है जहां फुटबॉल के मैच देखने हर रविवार को आया करते थे. मैदान भी है. गोल पोस्ट भी है. खिलाड़ी भी हैं लेकिन फुटबॉल गायब है. क्रिकेट खेला जा रहा है. विकास हो रहा है निश्चित रुप से. फुटबॉल से क्रिकेट तक आना विकास ही कहा जाएगा क्योंकि क्रिकेट तो भद्र लोगों का खेल है. फुटबॉल तो लातिन अमरीका और अफ्रीका के बर्बर देश भी खेलते हैं. मेरा शक सुबहा अब यकीन में बदल गया था कि झारखंड में विकास ज़ोरों पर है.
...........ऐसा नहीं की मैं झारखण्ड की तरक्की नहीं देखना चाहता बल्कि मैं चाहता हूँ  की यहाँ की मूलवासी दुनिया को देखे और झारखण्ड  की राजनीति को समझे की ये नेता जो यहाँ की मूलवासी के हितेषी होने का  दावा तो करती है  पर क्या करती है इसका जवाब यही  है  की पिछले 9 सालों  में यहाँ  9 सरकारें  आई और गई .....मैं चाहता हु की यहाँ के युवा लेडी गागा , रीहाना, और एनरीक का गाना सुनने के साथ साथ उन्हें जाने और साथ में ये भी जाने की दुनिया में क्या हो रहा है..... कई ऐसे लोग भी  होंगे  जो मेरे विचारों से सहमत नहीं होंगे  पर झारखण्ड- जहाँ खनीज की इतनी प्रचुरता है अगर यह  किसी अन्य राज्य में होता तो .............इसका जवाब  हैं।

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